
रायपुर के डॉक्टर ने जीती लंबी कानूनी लड़ाई, कंपनी ने पेट्रोल में मिलावट का दिया था हवाला
रायपुर। इन दिनों पूरे देश में E20 (इथेनॉल ब्लेंडेड) पेट्रोल को लेकर एक नई बहस छिड़ी हुई है। सोशल मीडिया पर कई तरह के फोटो और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि E20 पेट्रोल से वाहनों के इंजन में खराबी आ रही है। इसी बहस और विवाद के बीच छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ उपभोक्ता न्यायालय ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कार कंपनी को ग्राहक को बिल्कुल नई कार देने का आदेश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, राजधानी रायपुर निवासी डॉ. रामराज ने साल 2024 में एक नई ग्रैंड विटारा (Grand Vitara) कार खरीदी थी। नई कार खरीदने के महज कुछ महीनों बाद ही उसमें तकनीकी समस्याएं आना शुरू हो गईं। जब डॉ. रामराज अपनी शिकायत लेकर कार कंपनी के पास पहुंचे, तो प्रबंधन ने गाड़ी को वारंटी के तहत ठीक करने से साफ इंकार कर दिया। कंपनी की तरफ से तर्क दिया गया कि कार में मिलावटी पेट्रोल का इस्तेमाल किया गया है, जिसके कारण इंजन में यह खराबी आई है।
उपभोक्ता फोरम से मिला न्याय
कंपनी के इस रवैये और सर्विस देने से मना करने पर परेशान डॉ. रामराज ने हार नहीं मानी। न्याय के लिए उन्होंने उपभोक्ता न्यायालय (Consumer Court) का दरवाजा खटखटाया। फोरम में दोनों पक्षों के बीच एक लंबी कानूनी लड़ाई चली।
कल इस बहुचर्चित मामले में कोर्ट ने अपना अंतिम फैसला सुनाया। कोर्ट ने कार कंपनी की दलीलों को अपर्याप्त मानते हुए ग्राहक के पक्ष में फैसला दिया। न्यायालय ने कार कंपनी को सख्त निर्देश दिया है कि वह डॉ. रामराज को पुरानी खराब कार के बदले एक बिल्कुल नई कार प्रदान करे।
फैसले के मायने
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में E20 पेट्रोल और वाहनों की इंजन क्षमता को लेकर उपभोक्ताओं के बीच भारी संशय का माहौल है। कोर्ट का यह आदेश उन वाहन मालिकों के लिए एक बड़ी राहत है, जिन्हें कार कंपनियां पेट्रोल या अन्य तकनीकी बहाने बनाकर वारंटी का लाभ देने से पीछे हट जाती हैं। इस फैसले से साफ है कि कंपनियां केवल मिलावट का बेबुनियाद आरोप लगाकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकतीं।