
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल से खुला राज, उदित और अदिति कंस्ट्रक्शन के संदिग्ध बिलों पर उठे सवाल
जिले में पंचायत स्तर पर करोड़ों रुपये के कथित घोटाले का मामला गरमा गया है। सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के बलरामपुर दौरे पर यह मामला सीधे उनके पास पहुंचा। सर्व आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष बसंत कुजूर ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पंचायतों में हो रही वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी राशि के गबन के गंभीर दस्तावेजी सबूत सौंपे हैं। शिकायत के बाद अब प्रशासन और सत्ता के गलियारों में खलबली मच गई है।
एक ही बिल, कई पंचायतें: कैसे हुआ खेल?
शिकायत में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि एक ही नाम और एक ही सीरियल नंबर वाले बिलों का इस्तेमाल अलग-अलग पंचायतों में राशि निकालने के लिए किया गया। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल से निकाले गए दस्तावेजों के अनुसार, बलरामपुर, रामचंद्रपुर और रामानुजगंज विकासखंड की पंचायतों में एक ही पैटर्न पर फर्जीवाड़ा किया गया।
इन पंचायतों के नाम आए सामने:
महाराजगंज, पचवाल, दहेजवार, ओबरी, तातापानी, धवली, चांकी, आरागाही और कुसफर जैसी पंचायतों में संदिग्ध लेनदेन की बात कही गई है।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि ‘उदित कंस्ट्रक्शन’ और ‘अदिति कंस्ट्रक्शन’ नामक फर्मों के नाम से संदिग्ध बिल लगाए गए हैं। इन बिलों में न केवल सीरियल नंबर की हेराफेरी है, बल्कि भारी भरकम GST चोरी की भी आशंका है। पदाधिकारियों का कहना है कि यह एक सुनियोजित आर्थिक अपराध है, जिसमें सरकारी पोर्टल के डेटा का उपयोग करके भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया।
सवालों के घेरे में जिम्मेदार:
क्या अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा संगठित खेल संभव है?
तत्कालीन जनपद CEO और तकनीकी अमले की मौजूदगी में ये बिल कैसे पास हुए?
क्या यह सिर्फ लापरवाही है या किसी बड़े सिंडिकेट का काम?
सर्व आदिवासी समाज ने सरकार से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
दोषियों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई हो।
गबन की गई सरकारी राशि की पाई-पाई वसूली जाए।
वाणिज्यिक कर विभाग (GST) के माध्यम से अलग से जांच हो।
मामला मुख्यमंत्री की दहलीज तक पहुंचने के बाद अब जिला प्रशासन की सक्रियता बढ़ गई है। ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि गहराई से जांच हुई, तो कई बड़े चेहरों और प्रभावशाली लोगों के नाम इस घोटाले में सामने आ सकते हैं। अब देखना होगा कि शासन इस भ्रष्टाचार पर कितना कड़ा प्रहार करता है या यह मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा।