
रायपुर। : छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान खरीदी की तैयारियों के बीच सरकार ने व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और धान के परिवहन पर निगरानी मजबूत करने के लिए सख्त नियम तय किए हैं। नई व्यवस्था के तहत धान की बोरियों पर QR कोड लगाने, परिवहन में इस्तेमाल होने वाले ट्रकों की GPS ट्रैकिंग करने और राइस मिलर्स को धान आवंटित करने से जुड़े प्रावधानों पर जोर दिया गया है। साथ ही, निर्धारित समय-सीमा में स्टेक का काम पूरा करना भी जरूरी होगा। धान खरीदी से पहले इन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सरकार के सामने बड़ी चुनौती है। वहीं, कांग्रेस ने QR कोड वाली बोरियों की उपलब्धता पर सवाल उठाते हुए तैयारियों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
हर बोरी पर QR कोड लगाने की व्यवस्था
धान खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए हर बोरी पर QR कोड लगाने का प्रावधान किया गया है। इसके माध्यम से धान की बोरियों की पहचान और उनके रिकॉर्ड की निगरानी आसान बनाने का उद्देश्य है। इस व्यवस्था से खरीदी और भंडारण से जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित रखने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इस व्यवस्था को जमीन पर लागू करने के लिए पर्याप्त संख्या में QR कोड वाली बोरियों की उपलब्धता और समय पर वितरण महत्वपूर्ण होगा। इसी मुद्दे पर कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि अब तक कितनी बोरियां तैयार की जा चुकी हैं और खरीदी शुरू होने से पहले सभी केंद्रों तक इनकी आपूर्ति कैसे सुनिश्चित की जाएगी।
धान परिवहन करने वाले ट्रकों की होगी GPS ट्रैकिंग
सरकार ने धान के परिवहन पर निगरानी रखने के लिए ट्रकों की GPS ट्रैकिंग का प्रावधान भी किया है। इसका उद्देश्य परिवहन के दौरान वाहनों की आवाजाही पर नजर रखना और धान की ढुलाई से जुड़ी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है। GPS ट्रैकिंग व्यवस्था के प्रभावी संचालन के लिए वाहनों में जरूरी उपकरणों की उपलब्धता, तकनीकी निगरानी और संबंधित विभागों के बीच समन्वय जरूरी होगा। धान खरीदी शुरू होने से पहले इस व्यवस्था की तैयारी पूरी करना प्रशासन के लिए अहम माना जा रहा है।
राइस मिलर्स को क्षमता का 75 प्रतिशत धान आवंटन
धान खरीदी और मिलिंग की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए राइस मिलर्स को उनकी निर्धारित क्षमता के 75 प्रतिशत तक धान आवंटित करने का प्रावधान बताया गया है। इसका उद्देश्य मिलिंग की प्रक्रिया को क्षमता के अनुरूप संचालित करना और धान के भंडारण तथा उठाव में बेहतर तालमेल बनाए रखना है। इस व्यवस्था के तहत मिलर्स की वास्तविक क्षमता, उपलब्ध संसाधनों और धान उठाव की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा, ताकि आवंटन और मिलिंग के बीच संतुलन बना रहे।
25 कार्य दिवस में स्टेक का काम पूरा करना होगा
नियमों के मुताबिक स्टेक का काम निर्धारित 25 कार्य दिवस के भीतर पूरा करने की समय-सीमा तय की गई है। धान की बोरियों को व्यवस्थित तरीके से रखने और भंडारण संबंधी कार्यों को समय पर पूरा करने के लिहाज से यह समय-सीमा महत्वपूर्ण है। खरीदी केंद्रों पर पर्याप्त जगह, श्रमिकों की उपलब्धता और परिवहन की व्यवस्था इस लक्ष्य को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगी। समय-सीमा का पालन नहीं होने पर भंडारण और आगे की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
नियमों के उल्लंघन पर ₹10 प्रति क्विंटल जुर्माने का प्रावधान
धान खरीदी से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए उल्लंघन की स्थिति में ₹10 प्रति क्विंटल जुर्माने का प्रावधान बताया गया है। इसका उद्देश्य संबंधित पक्षों को निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करने के लिए जवाबदेह बनाना है। हालांकि, जुर्माना किन परिस्थितियों में और किस प्रक्रिया के तहत लगाया जाएगा, इसकी स्पष्टता संबंधित आधिकारिक दिशा-निर्देशों से ही सुनिश्चित की जानी चाहिए।