
दुर्ग। पर्यावरण संरक्षण को जन-जन का संकल्प बनाने की दिशा में अध्यात्म पथ संस्थान द्वारा शहर में “वृक्षोपहार कार्यक्रम” का प्रभावशाली शुभारंभ किया गया है। अभियान के प्रथम चरण में 600 पौधे वितरण के लिए रखे गए हैं, जिन्हें नागरिकों को उपहारस्वरूप भेंट कर हरियाली और प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है।
’एक वृक्ष दस पुत्रों के समान’
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए आचार्य डॉ. अजय आर्य ने भारतीय चिंतन में वृक्षों के महत्त्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने शास्त्रों का हवाला देते हुए कहा कि “दस कुओं के बराबर एक बावड़ी, दस बावड़ियों के बराबर एक तालाब, दस तालाबों के बराबर एक पुत्र और दस पुत्रों के बराबर एक वृक्ष होता है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक अलंकारिक कथन नहीं है, बल्कि प्रकृति और जीवन के गहरे संबंध का प्रतीक है। वृक्ष हमें प्राणवायु, छाया और सुरक्षित भविष्य देते हैं।
परिवार के सदस्य की तरह करें पौधों की देखभाल
आचार्य डॉ. अजय आर्य ने कहा कि आज के समय में केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है; उन्हें बचाना और बड़ा करना असली चुनौती है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि जिस तरह माता-पिता अपने बच्चों का पालन-पोषण करते हैं, उसी प्रकार लगाए गए पौधों की भी देखभाल की जानी चाहिए। उन्होंने अपने संबोधन में जोर देकर कहा, “पौधे का मूल्य केवल इतना है – उसे लगाएँ, बचाएँ और बड़ा करें।”
अंतर्राष्ट्रीय वेद कथाकार (दिल्ली) आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री के निर्देशन में संचालित इस महाअभियान को अब व्यापक रूप दिया जा रहा है। संस्थान के अनुसार, आगामी तीन-चार चरणों में एक विशेष “वृक्ष रथ” तैयार किया जा रहा है। यह रथ घर-घर, गली-मोहल्लों और कॉलोनियों में जाकर लोगों को जागरूक करेगा, उन्हें उपहारस्वरूप पौधे भेंट करेगा और पर्यावरण संरक्षण को एक वास्तविक जनआंदोलन बनाएगा।
इस अवसर पर आचार्य डॉ. अजय आर्य, लोकनाथ साहू, प्रीति साहू, हेमा सक्सेना, प्रदीप यादव, आशी और आरोही प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।