
फिंगेश्वर, पाण्डुका और राजिम क्षेत्र में बेकाबू हुई आग, रिहायशी इलाकों तक पहुंची लपटें।
गरियाबंद/राजिम:
धान की फसल कटाई के बाद खेतों में बची पराली (पैरा) जलाने की कुप्रथा ने गरियाबंद जिले में एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। जिले के फिंगेश्वर, पाण्डुका और राजिम क्षेत्र के हजारों एकड़ खेतों में इन दिनों भीषण आग लगी हुई है। पराली में लगाई जा रही यह आग अब बेकाबू होकर जनजीवन और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बन गई है।
खेतों से उठने वाले धुएं ने महासमुंद-राजिम मुख्य मार्ग को पूरी तरह से अपनी चपेट में ले लिया है। सड़क पर धुएं का घना गुबार छाने से विजिबिलिटी (दृश्यता) बेहद कम हो गई है। इसके चलते इस व्यस्त मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और किसी बड़े सड़क हादसे की आशंका लगातार बनी हुई है।
खेतों में लगी यह आग अब सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि तेज हवाओं के कारण आग की लपटें लोगों के घरों और रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ने लगी हैं। इससे ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल है। लोग रात-दिन अपने घरों और खलिहानों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
पलारी जलने से उठने वाले जहरीले धुएं के कारण आसपास के गांवों और कस्बों में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। लोगों, विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही, हजारों एकड़ में लगी इस भीषण आग की तपिश ने पूरे इलाके का तापमान भी अचानक बढ़ा दिया है, जिससे उमस और गर्मी का अहसास होने लगा है
पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य को हो रहे इतने बड़े नुकसान के बावजूद स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग पूरी तरह से मूकदर्शक बने हुए हैं। पराली जलाना कानूनी रूप से प्रतिबंधित होने के बावजूद, आग लगाने वालों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। प्रशासन की इस घोर लापरवाही और उदासीनता को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश पनप रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन तुरंत इस मामले में संज्ञान ले और आग लगाने वालों पर सख्त कार्रवाई करे, ताकि इस बढ़ते संकट को रोका जा सके।