रूपे कार्ड के ₹2 लाख बीमा पर उपभोक्ता आयोग का अहम फैसलाATM से पैसे निकालना ही पर्याप्त नहीं, 45 दिनों में POS या ई-कॉमर्स ट्रांजेक्शन जरूरी

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रूपे कार्ड के ₹2 लाख बीमा पर उपभोक्ता आयोग का अहम फैसलाATM से पैसे निकालना ही पर्याप्त नहीं, 45 दिनों में POS या ई-कॉमर्स ट्रांजेक्शन जरूरी

बेमेतरा। रूपे प्लेटिनम डेबिट कार्ड पर मिलने वाले व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा को लेकर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बेमेतरा ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि केवल एटीएम कार्ड रखने या एटीएम से नकद राशि निकालने मात्र से दुर्घटना बीमा कवर की पात्रता पूरी नहीं होती। बीमा लाभ के लिए दुर्घटना की तारीख सहित पिछले 45 दिनों के भीतर कार्ड से कम से कम एक सफल POS या ई-कॉमर्स वित्तीय लेन-देन होना आवश्यक है।

मामला ग्राम भोईनाभाठा निवासी अमृत रात्रे द्वारा फिनो पेमेंट बैंक और टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ प्रस्तुत परिवाद से जुड़ा है। परिवादी के पुत्र विकास रात्रे की 12 अक्टूबर 2020 को सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। मृतक के पास फिनो पेमेंट बैंक का रूपे प्लेटिनम डेबिट कार्ड था, जिसके साथ ₹2 लाख का ग्रुप पर्सनल एक्सीडेंट बीमा कवर बताया गया था।
परिवादी के अनुसार मृतक ने दुर्घटना से महज छह दिन पहले, 6 अक्टूबर 2020 को कॉर्पोरेशन बैंक के एटीएम से ₹500 की नकद निकासी की थी। इसके आधार पर बीमा राशि के लिए दावा प्रस्तुत किया गया, लेकिन बीमा कंपनी ने 23 फरवरी 2021 को दावा खारिज कर दिया। कंपनी का कहना था कि दुर्घटना से पूर्व निर्धारित 45 दिनों की अवधि में कार्ड से POS अथवा ई-कॉमर्स ट्रांजेक्शन नहीं किया गया था।

NPCI के नियम का दिया हवाला
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल तथा सदस्य ओमप्रकाश चंद्राकर और सलमा शरीफ ने 8 सितंबर 2026 को मामले में फैसला सुनाया। आयोग ने भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के 31 मार्च 2020 के संबंधित परिपत्र का हवाला देते हुए कहा कि वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए रूपे कार्ड बीमा नियमों में बदलाव किया गया था।


संशोधित नियमों के अनुसार दुर्घटना की तारीख सहित पिछले 45 दिनों में POS या ई-कॉमर्स पर सफल वित्तीय लेन-देन होना आवश्यक था। पूर्व में ATM/MicroATM से किए गए लेन-देन को भी इस उद्देश्य से मान्य माना जाता था, लेकिन संशोधित नियमों में इसकी पात्रता समाप्त कर दी गई थी।


चूंकि मृतक के मामले में उपलब्ध लेन-देन केवल एटीएम से नकद निकासी का था और निर्धारित अवधि में POS या ई-कॉमर्स लेन-देन का प्रमाण नहीं मिला, इसलिए आयोग ने बीमा कंपनी द्वारा दावा खारिज करने को सेवा में कमी नहीं माना और परिवाद खारिज कर दिया।

उपभोक्ताओं के लिए जरूरी संदेश
POS ट्रांजेक्शन का मतलब दुकान, मॉल या अन्य प्रतिष्ठान पर कार्ड मशीन के माध्यम से सामान अथवा सेवा का भुगतान करना है। वहीं ई-कॉमर्स ट्रांजेक्शन में ऑनलाइन खरीदारी के दौरान डेबिट कार्ड से किया गया भुगतान शामिल है।


फैसले से उपभोक्ताओं को यह समझना जरूरी है कि डेबिट कार्ड के साथ मिलने वाले दुर्घटना बीमा की शर्तें केवल कार्ड रखने या ATM से पैसे निकालने तक सीमित नहीं हैं। बीमा कवर की पात्रता बनाए रखने के लिए संबंधित कार्ड की लागू शर्तों और लेन-देन की आवश्यकताओं की जानकारी रखना भी जरूरी है।

बीमा कंपनी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता कमल नयन चतुर्वेदी ने भी उपभोक्ताओं से सेवाओं और बीमा कवर की शर्तों के प्रति जागरूक रहने की अपील की। उनका कहना है कि जानकारी के अभाव में कई बार उपभोक्ता उपलब्ध लाभ और अनुतोष से वंचित रह जाते हैं।

उपभोक्ताओं के लिए क्या है ‘POS’ और ‘ई-कॉमर्स’?
बीमा की शर्तों को आसान भाषा में समझना जरूरी है:
POS (Point of Sale): इसका मतलब है किसी दुकान या मॉल (जैसे Dmart आदि) में जाकर सामान खरीदने के बाद मशीन में अपना एटीएम कार्ड स्वाइप करके पेमेंट करना।

ई-कॉमर्स (E-commerce): इसका अर्थ है इंटरनेट के माध्यम से शॉपिंग करना और अपने एटीएम कार्ड से डिजिटल भुगतान करना।


ध्यान रखें: सिर्फ एटीएम मशीन से पैसे निकालना (Cash Withdrawal) इस बीमा को चालू रखने के लिए पर्याप्त ‘वित्तीय ट्रांजेक्शन’ नहीं है।

जागरूकता ही है बचाव
इस प्रकरण के संदर्भ में बीमा कंपनी के अधिवक्ता कमल नयन चतुर्वेदी ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है:
“उपभोक्ता अक्सर जागरूकता और जानकारी के अभाव के कारण वास्तविक लाभ और अनुतोष से वंचित रह जाते हैं।”
उपभोक्ताओं को सेवा प्रदाता कंपनी से जानकारी लेने में न तो हिचकना चाहिए और न ही लापरवाही दिखानी चाहिए।
अपने एटीएम या डेबिट कार्ड पर बीमा सुरक्षा को निरंतर जारी रखने के लिए यह अनिवार्य है कि आप नियमित रूप से उसका उपयोग ‘POS’ या ऑनलाइन (ई-कॉमर्स) माध्यमों पर करते रहें।


अधिवक्ता कमल नयन चतुर्वेदी द्वारा यह भी बताया गया कि विधिक जागरूकता बढ़ाने के लिए उनके फर्म द्वारा सेमिनार आयोजित किए जाते रहे हैं और शीघ्र ही आम जनता के लिए सेमिनार/वेबिनार का आयोजन किया जाएगा।

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