भिलाई , रिसाली , चरोदा निगम में वार्ड आरक्षण से बदला चुनावी गणित, कई दिग्गजों के वार्ड आरक्षित

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भिलाई  , रिसाली , चरोदा  निगम में वार्ड आरक्षण से बदला चुनावी गणित, कई दिग्गजों के वार्ड आरक्षित

भिलाई, भिलाई-चरोदा और रिसाली निगम में आरक्षण की तस्वीर साफ; कई मौजूदा पार्षदों के चुनावी समीकरण बदले

दुर्ग। नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियों के बीच भिलाई नगर निगम सहित भिलाई-चरोदा और रिसाली नगर निगम के वार्डों का आरक्षण तय होने के बाद जिले की सियासत में हलचल तेज हो गई है। आरक्षण प्रक्रिया लॉटरी पद्धति से पूरी की गई। इसके साथ ही कई मौजूदा पार्षदों और प्रमुख राजनीतिक दावेदारों के चुनावी समीकरण बदल गए हैं। अब राजनीतिक दलों में टिकट के दावेदारों को लेकर नए सिरे से रणनीति बनाने की कवायद शुरू होने की संभावना है।


भिलाई निगम में 70 वार्डों का आरक्षण
भिलाई नगर निगम के 70 वार्डों का आरक्षण कला मंदिर में कलेक्टर, निगम आयुक्त और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में लॉटरी पद्धति से किया गया। प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए स्कूली छात्र-छात्राओं के हाथों पर्चियां निकलवाई गईं।


आरक्षण प्रक्रिया के दौरान कई चर्चित पार्षदों के मौजूदा वार्ड आरक्षित श्रेणी में चले गए। आदित्य सिंह, दया सिंह और विनोद सिंह के वार्ड ओबीसी के लिए आरक्षित हुए हैं। जोन अध्यक्ष भूपेंद्र यादव का वार्ड सामान्य महिला तथा सभापति गिरधर बंटी का वार्ड भी सामान्य महिला के लिए आरक्षित हुआ है।


सेक्टर-6 के पार्षद साकेत चंद्राकर, हुडको के सीजू एंथोनी और सेक्टर-7 के लक्ष्मीपति राजू के वार्ड महिला आरक्षण की श्रेणी में चले गए। पूर्व विधायक के पुत्र पार्षद संदीप निरंकारी का वार्ड एससी के लिए आरक्षित होने से उनके लिए मौजूदा वार्ड से चुनाव लड़ने की स्थिति बदल गई है। वहीं मन्नान गफ्फार खान का वार्ड महिला तथा विधायक रिकेश सेन का वार्ड ओबीसी महिला के लिए आरक्षित किया गया है।


भिलाई के 70 वार्डों में आरक्षण का गणित
आरक्षण के अनुसार भिलाई नगर निगम में 3 एसटी, 9 एससी, 15 ओबीसी, 8 ओबीसी महिला, 24 सामान्य और 11 सामान्य महिला वार्ड निर्धारित किए गए हैं।
एसटी: वार्ड क्रमांक 52, 62 तथा एसटी महिला वार्ड क्रमांक 61।
एससी: वार्ड क्रमांक 1, 5, 9, 32, 36 और 51। एससी महिला वार्ड क्रमांक 8, 43 और 69।
ओबीसी: वार्ड क्रमांक 2, 3, 4, 10, 19, 21, 27, 39, 40, 42, 44, 46, 49, 56 और 68।
ओबीसी महिला: वार्ड क्रमांक 6, 7, 26, 37, 38, 45, 54 और 66।
सामान्य महिला: वार्ड क्रमांक 11, 12, 15, 23, 24, 29, 35, 47, 48, 63 और 70।
महापौर नीरज पाल ने आरक्षण प्रक्रिया को पारदर्शी बताया, हालांकि उन्होंने एसटी-एससी जनसंख्या के आंकड़ों को लेकर आपत्ति की बात कही। भाजपा जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन ने कहा कि आरक्षण का आधार वर्ष 2011 की जनगणना को बनाया गया है। उन्होंने कहा कि निर्धारित एससी, एसटी और महिला सीटों के प्रावधान के अनुसार प्रक्रिया पूरी की गई है और पार्टी पारदर्शिता के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी।


भिलाई-चरोदा में 40 वार्डों का आरक्षण
भिलाई-चरोदा नगर निगम के 40 वार्डों का आरक्षण भी तय कर दिया गया है। यहां 21 वार्ड सामान्य वर्ग, 11 ओबीसी, 6 एससी और 2 एसटी वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं। महिलाओं के लिए अलग-अलग वर्गों में कुल 13 वार्ड आरक्षित हैं।


महिला आरक्षण में जरवाय, दादर, विश्व बैंक कॉलोनी, महामाया पारा, शांति पारा, डबरा पारा, शांति नगर, पद्मुनगर, शिक्षित नगर, पंचशील नगर ईस्ट, मोरिद और गनियारी सहित विभिन्न वार्ड शामिल हैं।


आरक्षण की तस्वीर साफ होने के बाद भिलाई-चरोदा में भी मौजूदा पार्षदों और संभावित दावेदारों के समीकरण प्रभावित हुए हैं।

रिसाली निगम में भी बदले चुनावी समीकरण
रिसाली नगर निगम के 40 वार्डों में 10 वार्ड ओबीसी, 7 एससी और 3 एसटी वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं। इनमें ओबीसी के 3, एससी के 2 और एसटी का 1 वार्ड महिला आरक्षित है। वहीं 20 वार्ड सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित किए गए हैं। विभिन्न वर्गों में महिलाओं के लिए कुल 13 वार्ड आरक्षित हैं।


रिसाली में भी कई मौजूदा पार्षदों के वार्ड आरक्षित श्रेणी में चले गए हैं। चंद्रभान सिंह ठाकुर का वार्ड एसटी महिला, केशव बंछोर का वार्ड ओबीसी महिला, ईश्वरी साहू का वार्ड एसटी और अनूप डे का वार्ड ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हुआ है।


अब टिकट को लेकर बढ़ेगी दावेदारी
कलेक्टर अभिजीत सिंह ने कहा कि आरक्षण की प्रक्रिया वर्ष 2011 की जनगणना में दर्ज जनसंख्या के आधार पर की गई है और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्वक संपन्न हुई। आरक्षण की घोषणा के साथ ही तीनों निगमों में राजनीतिक दलों के सामने टिकट वितरण की चुनौती भी बढ़ गई है। मौजूदा पार्षदों में जिनका वार्ड आरक्षित हो गया है, वे अब दूसरे वार्डों से संभावनाएं तलाश सकते हैं, जबकि आरक्षित वार्डों में नए दावेदारों को मौका मिलने की संभावना है।
आरक्षण के बाद अब राजनीतिक दलों में वार्डवार समीकरण, संभावित प्रत्याशियों और टिकट दावेदारी को लेकर बैठकों का दौर तेज होने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में यह आरक्षण नगरीय चुनाव की रणनीति और टिकट वितरण पर कितना असर डालता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

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