पुलिस जांच टीम पर जताया अविश्वास, आरोपी को बचाने का लगाया आरोप
• अधिवक्ता अभिषेक पांडे के माध्यम से लगाई याचिका, IAS से निष्पक्ष जांच की मांग
• अगले सप्ताह होगी मामले की अहम सुनवाई
बिलासपुर। अपने ही अधीनस्थ उप निरीक्षक (सब-इंस्पेक्टर) की पत्नी के यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों में निलंबित चल रहे आईपीएस (IPS) रतन लाल डांगी की मुश्किलें अब और बढ़ सकती हैं। मामले की जांच के लिए शासन द्वारा गठित पुलिस टीम की कार्यप्रणाली पर अविश्वास जताते हुए पीड़िता ने बिलासपुर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पीड़िता ने वर्तमान जांच पर असंतोष व्यक्त करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच किसी आईएएस (IAS) अधिकारी से कराने की मांग की है।
जांच अधिकारियों की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल पीड़िता ने अपनी याचिका में शासन द्वारा गठित जांच टीम के सदस्य आनंद छाबड़ा और मिलना कुर्रे की भूमिका पर कड़ी आपत्ति जताई है। पीड़िता का सीधा आरोप है कि जांच अधिकारी निलंबित आईपीएस को बचाने का प्रयास कर रहे हैं और वर्तमान जांच प्रक्रिया से उन्हें न्याय मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। इसी अविश्वास के चलते पीड़िता ने अधिवक्ता अभिषेक पांडे के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर न्याय की गुहार लगाई है। जानकारी के अनुसार, पीड़िता की इस याचिका पर हाईकोर्ट में अगले सप्ताह सुनवाई हो सकती है।
ऑनलाइन योग के बहाने प्रताड़ना और धमकियों का आरोप याचिका और पूर्व में की गई शिकायत के अनुसार, आईपीएस रतन लाल डांगी ने ऑनलाइन योग सिखाने के दौरान पीड़िता का मानसिक और यौन उत्पीड़न किया। आरोप है कि डांगी व्हाट्सऐप पर पीड़िता पर निर्वस्त्र होने और जबरन ऑनलाइन जुड़े रहने का दबाव बनाते थे।
जब पीड़िता ने इसका विरोध किया, तो आरोपी अधिकारी ने उनके पुलिस विभाग में पदस्थ उप निरीक्षक पति को झूठे मामलों में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी। साथ ही, पति का तबादला किसी घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र में कर देने का भय भी दिखाया गया।
10 अक्टूबर को हुई थी शिकायत, शासन ने किया था निलंबित लगातार मिल रही धमकियों और प्रताड़ना से तंग आकर पीड़िता ने 10 अक्टूबर 2025 को पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) से इस पूरे मामले की शिकायत की थी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पर अधीनस्थ की पत्नी द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था। महिला की शिकायत के आधार पर शासन ने सख्त कदम उठाते हुए आईपीएस रतन लाल डांगी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था।
अब पीड़िता द्वारा हाईकोर्ट का रुख करने और पुलिस जांच पर सवाल उठाने के बाद इस हाई-प्रोफाइल मामले में आगे क्या कानूनी निर्देश आते हैं, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।