भारती विश्वविद्यालय और सीएसवीटीयू भिलाई के बीच हुआ एमओयू, उच्च शिक्षा और अनुसंधान को मिलेगी नई दिशा

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भारती विश्वविद्यालय और सीएसवीटीयू भिलाई के बीच हुआ एमओयू, उच्च शिक्षा और अनुसंधान को मिलेगी नई दिशा

दुर्ग। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता, नवाचार और अनुसंधान को नई दिशा प्रदान करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसके तहत भारती विश्वविद्यालय, दुर्ग और छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (सीएसवीटीयू), भिलाई के बीच एक अहम समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य दोनों संस्थानों के बीच शैक्षणिक सहयोग, नवाचार, कौशल विकास और विद्यार्थियों के समग्र विकास को बढ़ावा देना है।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भारती विश्वविद्यालय, दुर्ग के कुलसचिव प्रो. (डॉ.) वीरेन्द्र कुमार स्वर्णकार, उप कुलपति डॉ. आलोक भट्ट, सीएसवीटीयू के कुलसचिव अमित सिंह राजपूत और सहायक प्राध्यापक श्री पंकज स्वर्णकार की गरिमामयी उपस्थिति में दोनों संस्थानों के अधिकृत प्रतिनिधियों ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

समझौते के प्रमुख बिंदु: इस एमओयू के तहत दोनों विश्वविद्यालय मिलकर कई महत्वपूर्ण कदम उठाएंगे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • संयुक्त शोध (रिसर्च) परियोजनाओं का संचालन।
  • नवाचार (इनोवेशन) और स्टार्टअप गतिविधियों को प्रोत्साहन।
  • कौशल विकास कार्यक्रमों का आयोजन और इंटर्नशिप के अवसरों का विस्तार।
  • कार्यशालाओं, सेमिनारों, वेबिनारों तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का संयुक्त आयोजन।
  • दोनों संस्थानों के शिक्षकों और विद्यार्थियों का शैक्षणिक आदान-प्रदान।

गुणवत्तापूर्ण व रोजगारपरक शिक्षा की दिशा में अहम कदम इस अवसर पर भारती विश्वविद्यालय के उप कुलपति डॉ. आलोक भट्ट ने कहा कि यह समझौता विश्वविद्यालय की सतत गुणवत्तापूर्ण, शोधोन्मुख और रोजगारपरक शिक्षा प्रदान करने की प्रतिबद्धता का ही एक परिणाम है। वहीं, सीएसवीटीयू के कुलसचिव अमित सिंह राजपूत ने इस एमओयू को ज्ञान, नवाचार और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एक बेहद सकारात्मक पहल बताया। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों संस्थानों की विशेषज्ञता और संसाधनों के समन्वय से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को व्यापक लाभ मिलेगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को मिलेगी गति कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे उच्च शिक्षा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला कदम बताया। यह समझौता न केवल प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोगात्मक संस्कृति को बढ़ावा देगा, बल्कि ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020’ के उद्देश्यों की पूर्ति में भी एक मील का पत्थर साबित होगा। इस पहल से शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित होंगे और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण हो सकेगा।

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