
मुख्य न्यायाधिपति रमेश सिन्हा के मार्गदर्शन में दुर्ग जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने आयोजित किए विशेष शिविर
दुर्ग |‘अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस’ के अवसर पर शुक्रवार को जिले के विभिन्न क्षेत्रों में विधिक जनजागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा के मार्गदर्शन में आयोजित इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य श्रमिकों को उनके कानूनी अधिकारों और कल्याणकारी योजनाओं के प्रति सचेत करना रहा।
मुख्य न्यायाधिपति द्वारा समय-समय पर यह निर्देशित किया गया है कि समाज के वंचित वर्ग, विशेषकर श्रमिकों को गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क विधिक सहायता सुनिश्चित करना न्याय प्रणाली की प्राथमिकता है। इसी विजन को धरातल पर उतारते हुए दुर्ग जिले में व्यापक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए गए।
जिले का मुख्य कार्यक्रम सेठ रतनचंद सुराना लॉ कॉलेज में आयोजित हुआ। यहाँ तृतीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश ने श्रमिकों को संबोधित करते हुए श्रम कानूनों, कार्यस्थल पर सुरक्षा और शोषण के विरुद्ध मिलने वाले संरक्षण की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी श्रमिक आर्थिक तंगी के कारण न्याय से वंचित न रहे, इसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण निःशुल्क कानूनी सहायता देने के लिए सदैव तत्पर है।
शिविर में केंद्रीय जेल और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पैरालीगल वॉलंटियर्स (PLV) व LADCS कर्मचारियों द्वारा तैयार की गई चित्रकला प्रदर्शनी भी लगाई गई। कानूनी संदेशों को कला के माध्यम से प्रदर्शित करती इस प्रदर्शनी को उपस्थित लोगों ने काफी सराहा।
कार्यक्रम में अष्टम जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव, कॉलेज प्राचार्य अखिलेश अग्रवाल, विभिन्न अधिवक्तागण और श्रम विभाग के अधिकारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
केवल शहर ही नहीं, बल्कि जिले के अन्य दूरस्थ स्थानों पर भी न्यायाधीशों और पैरालीगल वॉलंटियर्स ने मोर्चा संभाला। पीएलवी (PLVs) ने:
पॉम्पलेट वितरण कर सरल भाषा में कानून समझाए।
जनसंवाद और व्यक्तिगत परामर्श के माध्यम से श्रमिकों की शंकाओं का समाधान किया।
सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभ उठाने की प्रक्रिया बताई।
”न्याय का संकल्प:” मुख्य न्यायाधिपति के निर्देशानुसार, नेशनल लोक अदालतों के माध्यम से भी श्रमिकों के प्रकरणों का त्वरित निराकरण किया जा रहा है, ताकि उन्हें वर्षों तक अदालतों के चक्कर न लगाने पड़ें।