देशभक्ति नारों से नहीं, कर्मों से सिद्ध होती है : आचार्य डॉ. अजय आर्य

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देशभक्ति नारों से नहीं, कर्मों से सिद्ध होती है : आचार्य डॉ. अजय आर्य

कैप्टन स्मित मच्छार को भारत रत्न देने की मांग, आर्य समाज सेक्टर-6 के साप्ताहिक सत्संग में देशभक्ति और भारतीयता पर हुआ मंथन

भिलाई। आर्य समाज मंदिर सेक्टर-6 भिलाई में आयोजित साप्ताहिक सत्संग में आचार्य डॉ. अजय आर्य ने देशभक्ति और भारतीय संस्कृति पर विचार रखते हुए कहा कि सच्ची देशभक्ति केवल युद्ध, हथियार और संघर्ष तक सीमित नहीं है। देशभक्ति का वास्तविक अर्थ सेवा, साहस, सत्य, संवेदना और मानवीय कर्तव्य के माध्यम से देश का गौरव बढ़ाना है। हमारा आचरण ऐसा होना चाहिए कि दुनिया में भारत का मस्तक ऊंचा हो।


आचार्य डॉ. अजय आर्य ने कहा कि भारत की पहचान उसकी संस्कृति और मानवीय मूल्यों से है। वसुधैव कुटुम्बकम् और सर्वे भवन्तु सुखिनः भारतीय जीवन-दृष्टि के मूल आधार हैं। विदेश में रहने या यात्रा करने के दौरान भी भारतीयों का व्यवहार ऐसा होना चाहिए कि उनके आचरण से भारतीय संस्कार, शालीनता, सत्य और ईमानदारी की पहचान हो।


उन्होंने अपने गुरुदेव पूज्य स्वामी विवेकानंद सरस्वती जी महाराज का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भारतीय होने की पहचान केवल वेशभूषा से नहीं, बल्कि विचार और व्यवहार से बनती है। हमारा प्रत्येक कर्म दुनिया के सामने भारत का प्रतिनिधित्व करता है।

कैप्टन स्मित मच्छार के साहस की सराहना
सत्संग में आचार्य डॉ. अजय आर्य ने दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान में यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े कैप्टन स्मित मच्छार के साहस का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संकट की स्थिति में अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भारतीय साहस और मानवीय संवेदना का उदाहरण है।


उन्होंने कहा कि कैप्टन स्मित मच्छार के साहस से न केवल यात्रियों का जीवन सुरक्षित हुआ, बल्कि दुनिया के सामने भारतीय कर्तव्यबोध और मानवता की भावना भी सामने आई। आचार्य डॉ. अजय आर्य ने उनके साहस और मानवीय कर्तव्य के लिए भारत रत्न से सम्मानित किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसे भारतीयों पर पूरे देश को गर्व होना चाहिए।

दूसरों के लिए तनाव नहीं, शांति का कारण बनें
आचार्य डॉ. अजय आर्य ने कहा कि व्यक्ति को अपने प्रभाव और ज्ञान का ऐसा प्रदर्शन नहीं करना चाहिए जिससे उसके आसपास रहने वाले लोग तनाव में आ जाएं। उन्होंने हास्यपूर्ण प्रसंग के माध्यम से समझाया कि हमें यह भी आत्ममंथन करना चाहिए कि कहीं हम स्वयं दूसरों के लिए तनाव का कारण तो नहीं बन रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सच्चा प्रभावशाली व्यक्ति वह नहीं होता जिससे लोग डरें, बल्कि वह होता है जिसके साथ रहने पर लोगों को शांति, आत्मीयता, विश्वास और प्रेरणा मिले। देशभक्ति भी इसी भावना से जुड़ी है। हमारे कर्मों से मानवता सुरक्षित हो, देश का सम्मान बढ़े और दुनिया भारत की ओर विश्वास से देखे, यही सच्चे अर्थों में भारतीयता है।


साप्ताहिक सत्संग में वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया गया। आचार्य नंदलाल आर्य ने भजन प्रस्तुत किया। आर्य समाज के मंत्री प्रवीण गुप्ता ने कार्यक्रम का संचालन किया, जबकि प्रधान अवनी भूषण पुरंग ने अतिथियों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में जितेंद्र यतींद्र, सोनिया, नमिता ठाकुर, सौम्या देशमुख, पतिराम साहू, मनोज ठाकरे सहित आर्य समाज एवं समाज के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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