
नई दिल्ली। नीट री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम पर कथित अस्थायी रोक को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने के बजाय डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि,”Telegram Ban’ – मोदी सरकार का पेपर लीक रोकने का नया नुस्खा। यानी चोर को पकड़ने के बजाय, पीड़ित के घर पर ताला लटका दो। लाखों छात्र सालों से Telegram पर पढ़ते हैं – नोट्स, टेस्ट सीरीज़, डिस्कशन, तैयारी। वो सुविधा छीन लेना पेपर लीक का समाधान कैसे हुआ? और यह फूलप्रूफ भी नहीं है – यह देश का हर छात्र जानता है, और पेपर लीक माफ़िया भी। फिर अगला ban किसपर लगाएंगे? WhatsApp? परीक्षा के दिन छात्रों की तलाशी होगी। जेबें कैंची से काटी जाएँगी।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि,”Telegram Ban’ – मोदी सरकार का पेपर लीक रोकने का नया नुस्खा। यानी चोर को पकड़ने के बजाय, पीड़ित के घर पर ताला लटका दो। लाखों छात्र सालों से Telegram पर पढ़ते हैं – नोट्स, टेस्ट सीरीज़, डिस्कशन, तैयारी। वो सुविधा छीन लेना पेपर लीक का समाधान कैसे हुआ? और यह फूलप्रूफ भी नहीं है – यह देश का हर छात्र जानता है, और पेपर लीक माफ़िया भी। फिर अगला ban किसपर लगाएंगे? WhatsApp? परीक्षा के दिन छात्रों की तलाशी होगी। जेबें कैंची से काटी जाएँगी।
उन्होंने कहा कि,’ प्रश्नपत्र वायुसेना से भेजे जाएँगे, दिखावे की कोई कमी नहीं होगी पर बीमारी की जड़ पर एक वार भी नहीं – क्योंकि पेपर लीक माफ़िया इसी सरकार की देख-रेख में फल-फूल रहा है, और युवाओं को खून के आँसू रुला रहा है। मोदी जी – दिखावा छोड़िए। माफ़िया पर वार कीजिए, छात्र पर नहीं। ‘छात्रों की गूंज’ सुन लीजिए – वरना देश का युवा अपना हक़ लेना जानता है।’
वहीं टेलीग्राम के संस्थापक की ओर से भी इस मामले पर प्रतिक्रिया सामने आई है। उनका कहना है कि यदि कुछ लोगों द्वारा प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर परीक्षा से जुड़ी सामग्री साझा की गई है, तो उसके लिए पूरे प्लेटफॉर्म के करोड़ों उपयोगकर्ताओं को प्रभावित करना उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने दावा किया कि इस तरह के प्रतिबंध से समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होती, क्योंकि गलत गतिविधियों के लिए अन्य माध्यमों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस बीच परीक्षा सुरक्षा और पेपर लीक रोकने को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई के साथ-साथ लीक नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कदम उठाना भी जरूरी है। हालांकि, इस पूरे मामले को लेकर सरकार की ओर से आधिकारिक स्तर पर विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।